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1. श्री बाँके बिहारी मंदिर (वृंदावन)

श्री बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारिक मंदिर है। यह वही स्थान है जहाँ स्वामी हरिदास जी ने अपने भजन से “बिहारी जी” को प्रकट किया था। यहाँ दर्शन हमेशा पर्दा प्रणाली से होते हैं, ताकि ठाकुरजी की दिव्य छवि एकदम सीधी किसी को अभिभूत न कर दे। मंदिर में प्रतिदिन हजारों भक्त आते हैं और त्योहारों पर लाखों की भीड़ उमड़ती है — विशेषकर होली, झूलन, बसंत पंचमी और शरद पूर्णिमा पर।

आरती समय (Summer)

  • सुबह दर्शन: 7:30 AM – 12 PM
  • शाम दर्शन: 5:30 PM – 9:30 PM

आरती समय (Winter)

  • सुबह दर्शन: 8:30 AM – 1 PM
  • शाम दर्शन: 4:30 PM – 8:30 PM

Best Time to Visit

सुबह 9–10 बजे भीड़ कम रहती है। फूल बंगला सीजन विशेष आकर्षण है।

2. श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर (मथुरा)

यह वही पवित्र स्थान है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने कारागार में देवकी–वासुदेव से जन्म लिया था। मंदिर परिसर में स्थित गर्भगृह भी आज कारागार की तरह संरक्षित है। जन्माष्टमी पर यहाँ लाखों भक्त एकत्र होते हैं और मध्यरात्रि की आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है।

आरती समय (Summer)

  • मंगला आरती: 5:30 AM
  • शाम आरती: 7:00 PM

आरती समय (Winter)

  • मंगला आरती: 6:00 AM
  • शाम आरती: 6:30 PM

Best Time

सुबह जल्दी जाएँ, सुरक्षा जांच में समय लगता है।

3. प्रेम मंदिर (वृंदावन)

सफेद संगमरमर से बना यह भव्य मंदिर आधुनिक ब्रज की पहचान है। रात्रि में होने वाला रंगीन LED शो इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। दीवारों पर बनी कृष्ण लीला की झांकियाँ हर भक्त को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

आरती समय (Summer)

  • मंगला आरती: 5:00 AM
  • शाम आरती: 7:00 PM

आरती समय (Winter)

  • मंगला आरती: 5:30 AM
  • शाम आरती: 6:30 PM

Special Note

7:30–8:30 PM का लाइट शो अवश्य देखें।

4. ISKCON कृष्ण बलराम मंदिर (वृंदावन)

ISKCON मंदिर गौड़ीय वैष्णव परंपरा का केंद्र है। यहाँ विदेशी और भारतीय भक्त मिलकर हरे कृष्ण महामंत्र की कीर्तन में डूब जाते हैं। कृष्ण–बलराम की मूर्तियाँ अत्यंत आकर्षक हैं और मंदिर का प्रसाद पूरे ब्रज में प्रसिद्ध है।

आरती समय (Summer)

  • मंगला आरती: 4:30 AM
  • राजभोग: 12:30 PM
  • संध्या: 7 PM

आरती समय (Winter)

  • मंगला: 5:00 AM
  • संध्या: 6:30 PM

5. निधिवन (वृंदावन)

निधिवन वृंदावन का सबसे रहस्यमय स्थान है। मान्यता है कि रात्रि में यहाँ राधा–कृष्ण की रासलीला होती है। सूर्यास्त के बाद प्रवेश पूर्णतः बंद कर दिया जाता है। यहाँ का रंग महल विशेष प्रसिद्ध है जहाँ सुबह नए श्रृंगार के चिह्न मिलते हैं।

दर्शन समय

  • Summer: 5:30 AM – 7 PM
  • Winter: 6:30 AM – 6 PM

6. राधा रमण मंदिर (वृंदावन)

यह मंदिर गोस्वामी गोकुलनाथ जी द्वारा स्थापित है। यहाँ की मूर्ति स्वयं प्रकट मानी जाती है और राधा जी का स्वरूप शालिग्राम शिला से माना गया है। आरती और पूजा-विधि अत्यंत विधिवत और वैदिक शैली में होती है।

आरती समय

  • मंगला: 4:00 AM
  • राजभोग: 12:00 PM
  • संध्या: 6:30 PM

7. राधा वल्लभ मंदिर (वृंदावन)

यह मंदिर राधा-भक्ति का सर्वोच्च स्थान माना जाता है। यहाँ श्रीकृष्ण की मूर्ति के साथ राधा जी का स्थान चांदी के मुकुट के रूप में है — जो राधा-प्रधान भक्ति परंपरा को दर्शाता है।

आरती समय

  • सुबह: 6:00 AM
  • शाम: 7:00 PM

8. गोविंद देव जी मंदिर (वृंदावन)

यह मंदिर मुगल काल में बना था और अपने समय की सबसे भव्य इमारतों में से एक था। यहाँ सात मंजिला मंदिर बनाया गया था, जिसका केवल तीन मंजिला भाग आज मौजूद है। श्री गोविंद देव जी की कृपा यहाँ अत्यंत अनुभव की जाती है।

आरती समय

  • सुबह: 5:30 AM
  • शाम: 6:30 PM

9. रंगजी मंदिर (वृंदावन)

डॉ. राधाकृष्णन की परंपरा से जुड़ा यह द्रविड़ शैली का विशाल मंदिर दक्षिण भारतीय संस्कृति और ब्रज संस्कृति का अद्भुत संगम है। मंदिर में सोने का स्तंभ (ध्वज स्तंभ) विशेष आकर्षक है।

आरती समय

  • सुबह: 6:00 AM
  • शाम: 6:30 PM

10. केशव देव मंदिर (मथुरा)

केशव देव मंदिर मथुरा के सबसे प्राचीन मंदिरों में एक है, जहाँ भगवान कृष्ण ने केशव-रूप में मधुर प्रभा प्रकट की थी। मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है।

आरती समय

  • सुबह: 5:00 AM
  • शाम: 7:00 PM

11. जयपुर मंदिर (वृंदावन)

जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह द्वारा बनवाया गया यह मंदिर अपने विशाल लाल बलुआ–पत्थर के स्तंभों, राधा–माधव जी की दिव्य मूर्तियों और शिल्प–कला के लिए विश्व-famous है। मंदिर की ऊँचाई, लंबाई और नक्काशी राजस्थान शैली का अद्भुत मिश्रण है। यहाँ की शांति और भव्यता भक्त को गहरे ध्यान की अवस्था में ले जाती है।

आरती समय

  • सुबह: 5:30 AM
  • शाम: 7:00 PM

12. शाहजी मंदिर (वृंदावन)

यह मंदिर अपने ऊँचे-ऊँचे 12 संगमरमर के स्तंभों और अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। भीतर स्थित ‘संगीत सभा’ एक कक्ष है जहाँ मनमोहक झूमर और कला की अनोखी झलक देखने को मिलती है। शाहजी मंदिर राधा–विनोद बिहारी जी की लीला स्थली माना जाता है।

आरती समय

  • सुबह: 6:00 AM
  • शाम: 7:00 PM

13. कट्यायिनी माता पीठ (वृंदावन)

यह शक्ति पीठ ब्रज की अद्वितीय शक्तिपीठों में से एक है जहाँ माँ दुर्गा कट्यायिनी रूप में विद्यमान हैं। मान्यता है कि गोपियों ने श्रीकृष्ण को पाने के लिए यहीं कठोर तपस्या की थी। नवरात्रि और बसंत पंचमी पर यहाँ विशेष भीड़ रहती है।

आरती समय

  • मंगला आरती: 5:00 AM
  • संध्या आरती : 6:30 PM

14. गोकुल – नंद यशोदा भवन

गोकुलवासी नंद बाबा और यशोदा मैया का यह घर वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी बाल–लीलाएँ कीं— जैसे माखन चोरी, उखल बंधन, ग्वालों के साथ खेलना, और गोपियों के साथ हँसी–मज़ाक। यहाँ की ऊर्जा इतनी दिव्य है कि भक्त स्वयं को उसी युग में महसूस करता है।

दर्शन समय

  • Summer: 5:00 AM – 12 PM | 4:00 PM – 8 PM
  • Winter : 6:00 AM – 1 PM | 3:30 PM – 7 PM

15. गोकुल – चिंताहरण घाट

चिंताहरण घाट वह लीला स्थल है जहाँ नंद बाबा की सभी चिंताएँ श्रीकृष्ण ने हर ली थीं। यहाँ यमुना तट पर बैठे-बैठे हर भक्त को अद्भुत शांति और सुकून मिलता है। नदी के किनारे सुबह-शाम होने वाली आरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी है।

आरती समय

  • सुबह यमुना आरती: 6:00 AM
  • शाम आरती : 7:00 PM

16. नंदगाँव – नंद भवन

नंदगाँव की ऊँची पहाड़ी पर स्थित नंद भवन वह घर है जहाँ नंद बाबा ने कृष्ण और बलराम का पालन-पोषण किया। यहाँ से संपूर्ण ब्रज का दिव्य दृश्य दिखाई देता है। मंदिर में कृष्ण–बलराम बचपन के रूप में विराजमान हैं।

आरती समय

  • सुबह: 5:30 AM
  • शाम : 7:00 PM

17. बरसाना – श्रीजी मंदिर (राधा रानी मंदिर)

बरसाना की लाड़ली किशोरी जी का यह मंदिर ब्रज में सबसे प्रमुख शक्ति और प्रेम स्थल माना जाता है। मंदिर ‘लाड़ली जी की पहाड़ी’ पर स्थित है, और 200+ सीढ़ियाँ चढ़कर भक्त शीर्ष पर पहुँचते हैं। लट्ठमार होली के समय यहाँ लाखों भक्त एकत्र होते हैं।

आरती समय

  • मंगला आरती: 5:00 AM
  • शाम आरती: 7:00 PM

18. बरसाना – माता कीर्ति मंदिर

यह मंदिर राधा रानी की माता—कीर्ति जी को समर्पित है। विशेषता यह है कि यहाँ राधा रानी की बाल–लीला स्वरूप मूर्ति है जो विश्व में कहीं और नहीं मिलती। मंदिर का वातावरण अत्यंत शुद्ध, शांत और भक्तिमय है।

आरती समय

  • सुबह: 6:00 AM
  • शाम: 7:00 PM

19. मानगढ – मन मंदिर

मानगढ़ पर स्थित मन मंदिर वह स्थान है जहाँ श्रीकृष्ण मन को स्थिर करने हेतु गोपियों के साथ लीला करते थे। यहाँ की शांति और ऊँची पहाड़ी का वातावरण एकदम ध्यानस्थ ऊर्जा प्रदान करता है। मंदिर का निर्माण जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने कराया।

आरती समय (Winter)

  • सुबह: 5:00 AM
  • शाम: 7:00 PM

20. चिंता हरन महादेव मंदिर — गोकुल

चिंता हरन महादेव गोकुल का एक पवित्र तिर्थ है, जहाँ मान्यता है कि स्वयं नंद बाबा और यशोदा मैया अपने पुत्र कृष्ण की सुरक्षा हेतु महादेव की आराधना करते थे। इस मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है। माना जाता है कि यहाँ पूजा करने से जीवन की सभी चिंताएँ दूर हो जाती हैं। मंदिर का वर्तमान स्वरूप प्राचीनतम शैव परंपरा को दर्शाता है और भक्तों को दिव्य शांति प्रदान करता है।

दर्शन विशेष: महादेव का शिवलिंग प्राकृतिक स्वरूप में विराजमान है जो भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करता है।

गौरव: यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु ‘चिंता मुक्ति’ की प्रार्थना लेकर आते हैं।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 5:00 AM
  • दोपहर आरती: 12:00 PM
  • शाम आरती: 7:00 PM

21. दाउजी मंदिर — बलदेव

दाउजी मंदिर भगवान बलराम को समर्पित ब्रज का एतिहासिक धाम है। यह मंदिर 1535 ईस्वी में स्थापित हुआ और यहाँ भगवान बलराम का अद्वितीय मूर्ति स्वरूप "रेवती संग" विराजमान है। सबसे विशेष ‘हुरंगा’ उत्सव है जिसमें रंग, गुलाल, और ब्रज की अनूठी परंपरा एक दिव्य रूप में देखने को मिलती है।

दर्शन विशेष: दाउजी का विग्रह स्वरूप ब्रज में कहीं और नहीं मिलता।

गौरव: हुरंगा उत्सव की वजह से इसे विश्व प्रसिद्धि प्राप्त है।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 6:00 AM
  • दोपहर आरती: 1:00 PM
  • शाम आरती: 7:30 PM

22. वृंदा कुंड — वृंदावन

यह धाम वृंदा देवी (तुलसी) का पावन स्थल माना जाता है। मान्यता है कि ब्रज की प्रत्येक लीला में वृंदा देवी ने ही दिव्य वातावरण तैयार किया। वृंदा कुंड का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिसे भक्त आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत मानते हैं। यहाँ शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत अनुभव देते हैं।

दर्शन विशेष: वृंदा देवी का दिव्य मंदिर, वृंदा कुंड का पवित्र सरोवर।

गौरव: विदेशी भक्तों का प्रिय स्थल।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 5:30 AM
  • शाम आरती: 6:30 PM

23. श्री राधा दामोदर मंदिर — वृंदावन

वृंदावन का यह प्राचीन मंदिर श्री जीव गोस्वामी द्वारा 1542 में स्थापित किया गया था। यहाँ का शिलारूप “शिला-स्वरूप” माने जाने वाले ‘श्रीनाथ शिला’ में स्वयं भगवान कृष्ण के चरण चिह्न हैं। भक्त मानते हैं कि इस धाम में चारों धामों के दर्शन का पुण्य मिलता है।

दर्शन विशेष: श्रीनाथ शिला, जीव गोस्वामी का भजन कुटिर।

गौरव: संतों के तपस्थल के रूप में विख्यात।

आरती समय

  • मंगल आरती: 4:30 AM
  • श्रृंगार आरती: 7:00 AM
  • सायं आरती: 7:00 PM

24. ब्रह्माण्ड घाट — गोकुल

यह वह दिव्य स्थान है जहाँ बालकृष्ण ने मिट्टी खाई और यशोदा मैया को अपने मुख में पूरा ब्रह्माण्ड दिखाया। घाट का वातावरण आज भी बाल-कृष्ण लीला का स्मरण कराता है। यहाँ गोकुलवासियों की सरल संस्कृति और कृष्ण प्रेम देखने योग्य है।

दर्शन विशेष: ब्रह्माण्ड दर्शन स्थल, शांत यमुना तट।

गौरव: यशोदा-कृष्ण प्रेम का अद्भुत प्रतीक।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 6:00 AM
  • शाम आरती: 6:30 PM

25. नन्द भवन — नन्दगाँव

यह वही स्थान है जहाँ कृष्ण-बलराम ने अपना बचपन बिताया। नन्द भवन से ब्रज का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। मंदिर की वास्तुकला प्राचीन ब्रज शैली का अद्भुत उदाहरण है, और यह स्थान प्रेम, उत्साह और बाल-लीलाओं की स्मृतियों से भरपूर है।

दर्शन विशेष: नंद-यशोदा का भवन, कृष्ण-बलराम की दिव्य चौकी।

गौरव: ब्रजवासियों के ‘लाडले कन्हैया’ का घर।

आरती समय

  • मंगल आरती: 5:00 AM
  • सायं आरती: 7:00 PM

26. रंगीली महल — बरसाना

रंगीली महल वर्तमान समय का एक प्रमुख आध्यात्मिक आश्रम है जिसे श्री कृष्ण कृपा धाम द्वारा स्थापित किया गया। यहाँ राधा-कृष्ण की भक्ति, कीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन एवं सेवाओं की निरंतर धारा बहती रहती है। महल का प्रांगण अत्यंत सुंदर, रमणीय और भक्तिभाव में डूबा हुआ है।

दर्शन विशेष: कीर्तन हॉल, भजन मंडप, राधा-कृष्ण के अलौकिक चित्र।

गौरव: प्रतिदिन भव्य संध्या आरती।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 6:00 AM
  • शाम आरती: 7:00 PM

27. वैष्णो देवी मंदिर — मथुरा

मथुरा स्थित वैष्णो देवी मंदिर जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध त्रिकूट पर्वत मंदिर का प्रतिरूप है। यहाँ माता वैष्णो देवी के साथ महालक्ष्मी और महाकाली भी विराजमान हैं। भक्तों को कठिन यात्रा किए बिना देवी माँ के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।

दर्शन विशेष: प्राकृतिक गुफा मार्ग, तीनों शक्तियों का एक साथ दर्शन।

गौरव: नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 5:30 AM
  • संध्या आरती: 7:00 PM

28. इस्कॉन गौशाला — वृंदावन

यह केवल एक गौशाला नहीं बल्कि गौ-सेवा का विश्व प्रसिद्ध केंद्र है। यहाँ हजारों गायों की सेवा, चिकित्सा, पोषण और संरक्षण अत्यंत प्रेम से किया जाता है। गौशाला का वातावरण अत्यंत शांति प्रदान करता है और भक्तों को गायों की सेवा का अवसर भी देता है।

दर्शन विशेष: गौ-सेवा, गौ-दान, श्रीकृष्ण के नाम का संकीर्तन।

गौरव: दुनिया की सबसे सुंदर और सुसज्जित गौशालाओं में से एक।

आरती समय

  • गौ आरती: 9:00 AM
  • सायं गौ सेवा: 5:00 PM

29. मथुरा संग्रहालय — मथुरा

मथुरा संग्रहालय भगवान श्रीकृष्ण, ब्रज संस्कृति और प्राचीन कला का एक जीवंत खजाना है। यहाँ मथुरा स्कूल ऑफ आर्ट की अद्भुत मूर्तियाँ और ऐतिहासिक पुरावशेष उपलब्ध हैं। ब्रज संस्कृति, इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दर्शन विशेष: प्राचीन मूर्तियाँ, सिक्के, शिलाएँ और ब्रज कला संग्रह।

गौरव: भारत के शीर्ष पुरातात्विक संग्रहालयों में शामिल।

समय

  • खुलने का समय: 10:30 AM – 4:30 PM
  • साप्ताहिक अवकाश: सोमवार

30. रसखान समाधि — वृंदावन

रसखान जी, जो श्रीकृष्ण के सर्वश्रेष्ठ भक्त कवियों में से एक माने जाते हैं, उनकी समाधि वृंदावन के शांति से भरपूर क्षेत्र में स्थित है। यहाँ पर उन्होंने अंतिम समय बिताया और अपने जीवन को सम्पूर्ण रूप से श्रीकृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया। समाधि स्थल बेहद दिव्य, शांत और भक्तिमय वातावरण प्रदान करता है।

दर्शन विशेष: समाधि के आसपास प्रकृति, प्राचीन शैली का स्मारक और भक्ति का अद्भुत अनुभव।

गौरव: कृष्णभक्ति के महान संत का तपस्थल।

आरती/दर्शन समय

  • दर्शन: 6:00 AM – 7:00 PM

31. मीराबाई मंदिर — वृंदावन

मीराबाई, भगवान कृष्ण की परम प्रेमिका और कवयित्री, कुछ समय के लिए इसी स्थान पर रही थीं। यह मंदिर उनकी भक्ति, प्रेम और त्याग का पवित्र प्रतीक है। यहाँ भक्त ‘मीरा बाई के भजन’ गा कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करते हैं।

दर्शन विशेष: मीरा का भजन स्थल, उनकी स्मृति में बने मंदिर कक्ष।

गौरव: मीरा प्रेम और कृष्ण भक्ति का केंद्र।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 6:00 AM
  • सायं आरती: 7:00 PM

32. राधा कुंड — गोवर्धन

राधाकुंड को ब्रज का सबसे पवित्र तिर्थ माना जाता है। मान्यता है कि स्वयं श्री राधा रानी ने इस कुंड का निर्माण किया और इसे ‘सबसे पवित्र स्थान’ कहा। यहाँ आधी रात को और कार्तिक मास में किया गया स्नान अत्यंत शुभ फलदायक होता है। आसपास के घाटों पर संतों की तपस्या का इतिहास भी जुड़ा हुआ है।

दर्शन विशेष: राधा-कृष्ण लीलास्थली, प्राचीन घाट, मन्दिर समूह।

गौरव: कार्तिक मास में लाखों भक्त स्नान हेतु आते हैं।

दर्शन समय

  • 24 घंटे खुला

33. श्याम वन — वृंदावन

श्याम वन ब्रज के प्राचीन 12 वनों में से एक है, जो श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं का केंद्र रहा है। कहा जाता है कि यहाँ कृष्ण अपने सखाओं के साथ गायों को चराते और रास खेलते थे। यह वन आज भी शांत, प्राकृतिक और दिव्य ऊर्जा से भरा हुआ प्रतीत होता है।

दर्शन विशेष: प्राकृतिक मार्ग, प्राचीन वृक्ष, रास स्थल।

गौरव: ब्रज का महत्वपूर्ण लीलास्थल।

दर्शन समय

  • सुबह से शाम तक

34. रंगजी मंदिर — वृंदावन

रंगजी मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। यह मंदिर 1851 में बना और श्री गोदाम्बा व भगवान रंगनाथ जी को समर्पित है। इसका विशाल गोपुरम और लंबी प्रांगण दीवारें इसे दक्षिण भारत के मंदिरों जैसा भव्य रूप देती हैं।

दर्शन विशेष: 50 फीट ऊँचा गोपुरम, स्वर्ण रथ यात्रा।

गौरव: ब्रज का सबसे लंबा मंदिर परिसर।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 5:30 AM
  • सायं आरती: 6:30 PM

35. जयपुर मंदिर — वृंदावन

जयपुर मंदिर 1917 में जयपुर राज्य के महाराजा सवाई माधोसिंह द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर पत्थर की भव्य नक्काशी और विशाल स्तम्भों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ श्री राधा-माधव और ललिता-विशाखा की सुंदर मूर्तियाँ विराजमान हैं।

दर्शन विशेष: विशाल नक्काशीदार पत्थर, राजस्थानी स्थापत्य कला।

गौरव: फोटो और वीडियो के लिए आकर्षक स्थान।

आरती समय

  • मंगल आरती: 5:00 AM
  • संध्या आरती: 7:00 PM

36. श्री कात्यायनी देवी पीठ — वृंदावन

कात्यायनी देवी पीठ, 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। राधा-कृष्ण की गोपियों ने यहीं देवी कात्यायनी की पूजा की थी ताकि उन्हें कृष्ण पति रूप में प्राप्त हों। मंदिर अत्यंत शक्तिशाली, पवित्र और भक्तों के लिए मनोकामना पूर्ति स्थल माना जाता है।

दर्शन विशेष: माता कात्यायनी का भव्य विग्रह, हवन कुण्ड।

गौरव: नवरात्रि में लाखों भक्त आते हैं।

आरती समय

  • प्रातः आरती: 5:30 AM
  • सायं आरती: 7:00 PM

37. सेवा कुंज — वृंदावन

सेवा कुंज वह पवित्र स्थल है जहाँ राधा-कृष्ण रात में विश्राम करते थे और जहाँ स्वर्गीय गोपियों द्वारा उनकी सेवा की जाती थी। दिन में इस स्थान को बंद रखा जाता है क्योंकि मान्यता है कि आज भी रात में यहाँ रास लीला होती है।

दर्शन विशेष: निकुंज वनों जैसा माहौल, ऐतिहासिक स्थल।

गौरव: रात्रि में किसी का प्रवेश निषिद्ध।

दर्शन समय

  • सुबह 7:00 AM – शाम 6:00 PM

38. मदनमोहन मंदिर — वृंदावन

मदनमोहन मंदिर ब्रज के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। श्री सनातन गोस्वामी द्वारा स्थापित यह मंदिर यमुना किनारे एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। इसका दृश्य अत्यंत भव्य और दिव्य अनुभव प्रदान करता है।

दर्शन विशेष: श्री मदनमोहन जी का विग्रह, प्राचीन वास्तुकला।

गौरव: वैष्णव परंपरा का आधार स्तम्भ।

आरती समय

  • मंगल आरती: 4:30 AM
  • शाम आरती: 7:00 PM

39. केसी घाट — वृंदावन

केसी घाट वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने दैत्य ‘केसी’ का वध किया था। यह घाट यमुना तट पर स्थित है और सूर्योदय व सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य अत्यंत अद्भुत होता है। यहाँ हर दिन यमुना आरती का भव्य आयोजन किया जाता है।

दर्शन विशेष: यमुना आरती, प्राचीन घाट, मनोहारी दृश्य।

गौरव: फोटोशूट के लिए ब्रज का सबसे लोकप्रिय स्थान।

आरती समय

  • यमुना आरती: 6:30 PM

40. चौरासी खम्भा (गोकुल)

गोकुल का प्रसिद्ध स्थान जहाँ श्रीकृष्ण के बाल-लीला प्रसंग जुड़े हैं। यहाँ के 84 स्तंभ अपने-आप में रहस्य और प्राचीनता लिए हुए हैं। यह मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला और स्तंभों की छायाओं के कारण भक्तों को आकर्षित करता है।

आरती टाइमिंग:
सर्दी (Winter): सुबह 06:30 – 07:00, शाम 18:00 – 18:30
गर्मी (Summer): सुबह 05:30 – 06:00, शाम 18:30 – 19:00

41. रमन रेती (गोकुल)

रमन रेती वह पावन भूमि है जहाँ नंदलाल अपने सखाओं के साथ रेत में खेला करते थे। यहाँ का वातावरण दिव्यता और अध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:00 – 06:30, शाम 17:30 – 18:00
गर्मी: सुबह 05:00 – 05:30, शाम 18:00 – 18:30

42. नंद भवन (गोकुल)

यहीं नंद बाबा और यशोदा मैया का निवास था। यह भवन भगवान की बाल लीलाओं का मुख्य केंद्र माना जाता है।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:30 – 07:00, शाम 18:00 – 18:30
गर्मी: सुबह 05:30 – 06:00, शाम 18:30 – 19:00

43. द्वारिकाधीश मंदिर (मथुरा)

मथुरा का प्रमुख मंदिर जहाँ श्रीकृष्ण द्वारिकाधीश रूप में विराजमान हैं। मंदिर की झांकियाँ और उत्सव भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षक हैं।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:00 – 06:30, शाम 18:30 – 19:00
गर्मी: सुबह 05:00 – 05:30, शाम 19:00 – 19:30

44. विश्राम घाट (मथुरा)

यमुना तट पर स्थित यह घाट मथुरा का प्रमुख स्थान है। यहाँ दीपदान और आरती अत्यंत दिव्य मानी जाती है।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:30 – 07:00, शाम 18:00 – 18:30
गर्मी: सुबह 05:30 – 06:00, शाम 18:30 – 19:00

45. भूतश्वर महादेव (मथुरा)

मथुरा के चार रक्षक देवताओं में से एक। यहाँ भगवान शिव की पूजा और भक्ति का विशेष महत्व है।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:30 – 07:00, शाम 18:30 – 19:00
गर्मी: सुबह 05:30 – 06:00, शाम 19:00 – 19:30

46. मदन मोहन मंदिर (वृंदावन)

गौड़ीय वैष्णव परंपरा का प्रमुख मंदिर। भक्त यहाँ भगवान मदन मोहन की सेवा में लीन होते हैं।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:00 – 06:30, शाम 18:00 – 18:30
गर्मी: सुबह 05:00 – 05:30, शाम 18:30 – 19:00

47. जुगल किशोर मंदिर (केशी घाट)

वृंदावन का प्राचीनतम मंदिरों में से एक। भक्त यहाँ आकर भगवान जुगल किशोर की भव्य मूर्ति की पूजा करते हैं।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:00 – 06:30, शाम 18:00 – 18:30
गर्मी: सुबह 05:00 – 05:30, शाम 18:30 – 19:00

48. तेड़ कदम्ब (नंदगांव मार्ग)

श्रीकृष्ण यहीं से गोपियों को मुरली की धुन पर बुलाते थे। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा है।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:30 – 07:00, शाम 18:00 – 18:30
गर्मी: सुबह 05:30 – 06:00, शाम 18:30 – 19:00

49. नंद महल (नंदगांव)

जहाँ कृष्ण-बलराम अपने परिवार के साथ निवास करते थे। यहाँ का दृश्य और मंदिर की प्राचीनता भक्तों को अतीत में ले जाती है।

आरती टाइमिंग:
सर्दी: सुबह 06:00 – 06:30, शाम 18:00 – 18:30
गर्मी: सुबह 05:00 – 05:30, शाम 18:30 – 19:00